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    प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान, बसोकुंड, मुजफ्फरपुर।

    प्रकाशित तिथि : नवम्बर 23, 2021
    Prakrit Jain Shashtra and Ahinsha Shodh Sansthan Basokund Muzaffarpur

    प्राकृत जैन संस्थान और अहिंसा शोध संस्थान बसोकुंड, वैशाली में स्थित है। इस संस्थान के संविधान में तीन निकायों का प्रावधान है। सबसे पहले, सामान्य परिषद, दूसरी कार्यकारी समिति और तीसरी प्रकाशन समिति। प्रथम दो निकायों का गठन शिक्षा विभाग में राज्य सरकार द्वारा किया जाता है और प्रकाशन समिति का गठन सामान्य परिषद द्वारा ही किया जाता है। बिहार के राज्यपाल पदेन अधिष्ठा (संरक्षक) हैं और बिहार के शिक्षा मंत्री सामान्य परिषद के पदेन “अध्यक्ष” हैं। कार्यकारी समिति और प्रकाशन समिति की अध्यक्षता आयुक्त, तिरहुत डिवीजन, पदेन अध्यक्ष के रूप में होती है। सामान्य परिषद संस्थान का सर्वोच्च निकाय है। सरकार को सिफारिशें भेजने से पहले समितियों द्वारा रखे गए प्रस्तावों पर सामान्य परिषद द्वारा विचार किया जाता है। संस्थान में 13,000 से अधिक पुस्तकों और सामान्य रूप से इंडोलॉजिकल विषयों की पत्रिकाओं और विशेष रूप से प्राकृत और जैनोलॉजी की एक अच्छी तरह से सुसज्जित पुस्तकालय है। सामान्य परिषद् सामान्यतया वर्ष में एक बार बैठक करेगी जिसमें सभी व्यवसाय जैसे पिछले वर्ष की वार्षिक रिपोर्ट, लेखा परीक्षा और लेखा पर विचार करना, संस्थान की बेहतरी के लिए योजना, योजनाओं और परियोजनाओं की जांच करना, छात्रवृत्ति, अनुसंधान के अगले वर्षों के कार्यक्रम को मंजूरी देना शामिल है। कार्यों और प्रकाशनों और बजट आदि को पारित करने के लिए।